8 જુલાઈ, 2015

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)

2 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में ‘मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA)’ ने ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) को मंजूरी दी।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत पांच वर्षों (2015-16 से 2019-20) के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है तथा मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 5300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
ज्ञातव्य है कि देश में कुल 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 65 प्रतिशत में सिंचाई सुविधा नहीं है।
‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
सिंचाई में निवेश में एकरूपता लाना।
‘हर खेत को पानी’ के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना।
खेतों में ही जल का इस्तेमाल करने की दक्षता को बढ़ाना ताकि पानी के अपव्यय को कम किया जा सके।
‘हर बूंद अधिक फसल’ के तहत सही सिंचाई और पानी को बचाने की तकनीक को अपनाना, आदि।
राष्ट्रीय स्तर पर‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ की निगरानी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सभी संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) द्वारा की जाएगी।
कार्यक्रम के कार्यान्वयन संसाधनों के आवंटन अंतर-मंत्रालयी समन्वय, निगरानी और प्रदर्शन के आकलन के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) गठित की जाएगी।
राज्य स्तर पर योजना का कार्यान्वयन संबंधित राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मंजूरी देने वाली समिति (SLSC) द्वारा किया जाएगा।
इस समिति के पास परियोजना को मंजूरी देने और योजना की प्रगति की निगरानी का पूरा अधिकार होगा।
कार्यक्रम को और बेहतर ढंग से लागू करने के लिए‘जिला स्तरीय समिति’भी होगी।
इस योजना में केंद्र 75 प्रतिशत अनुदान देगा और 25 प्रतिशत खर्च राज्यों के जिम्मे होगा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र और पर्वतीय राज्यों में केंद्र का अनुदान 90 प्रतिशत तक होगा।

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